पहली चूत चुदाई में की जन्नत की सैर -2
(Pahli Chut Chudai Me Ki Jannat Ki Sair-2)
This story is part of a series:
अब तक आपने पढ़ा..
मैं बाथरूम में जाकर बाथरूम का दरवाजा अन्दर से बंद कर बैठी रही।
लगभग 15 मिनट अन्दर बैठने के बाद जैसे ही मैं बाहर आई.. अंकल दरवाजे पर ही खड़े थे। उन्होंने मुझे पकड़ कर फिर अन्दर खींच लिया। वैसे मैं आपको बता दूँ मेरी हाइट 5.5 फीट है और उस समय मेरा शरीर पतला था.. मेरा वेट भी केवल 46 किलो था.. इसलिए अंकल को मुझे दुबारा बाथरूम के अन्दर खींचने में कोई तकलीफ़ नहीं हुई।
अब जो हुआ.. वो मेरे कुंवारे पन को खत्म कर देने वाला था।
अब आगे..
फिर अंकल ने अन्दर से बाथरूम का दरवाजा बंद करके मुझे अपनी बाँहों में भर लिया।
मैं अंकल को मना करने लगी- प्लीज़ अंकल.. ये सब ग़लत है.. आप मुझे जाने दो..
लेकिन जैसे अंकल पर तो जैसे भूत सवार था.. वो मेरे होंठों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे। मुझे रोना आ रहा था.. पर इतना डर लग रहा था कि कहीं चिल्लाई तो मेरी इज़्ज़त भी चली जाएगी और साथ में मेरे पापा की भी।
लोग कहेंगे कि क्या ज़रूरत थी अपनी जवान लड़की को दूसरों के घर सोने जाने देने की..
अंकल मुझे अपनी बाँहों में भर कर किस करने लगे, वो मेरे पूरे तन पर हाथ फेरने लगे। अचानक उनका एक हाथ मेरी उस जगह पर चला गया.. जहाँ पर जाने के बाद मैं उनका विरोध नहीं कर पाई।
अंकल का हाथ मेरी योनि पर चला गया था.. और वो उसको अपने हाथ से सहलाने लगे, अब मेरे हाथ-पैर ढीले हो गए, अब जो हाथ अंकल को दूर कर रहे थे.. वो हाथ खुद ब खुद अंकल को अपनी बाँहों में खींचने लगे।
अब मुझे भी थोड़ा मज़ा आने लगा।
अंकल ने मेरे आँखों में देखा और धीमे से मुस्कुरा गए.. मेरी आँखें भी झुक गईं।
अंकल ने फिर धीमे से मेरे गाऊन को ऊँचा करके खोलने लगे। मैंने अपने हाथ ऊपर कर दिए ताकि वो आराम से मेरा गाऊन खोल सकें।
अब अंकल ने अपनी लुंगी खोल दी और अब वो सिर्फ़ अंडररवियर और बनियान में रह गए थे, मैं भी ब्रा और पैन्टी में आ गई थी।
धीमे से अंकल ने अपनी बनियान खोल दी.. अंकल अब ऊपर से नंगे थे। उनके सीने पर जो बाल थे.. वो मुझे बहुत अच्छे लगने लगे। अंकल का फूला हुआ अंडररवियर मेरे सामने था.. उनका सफेद रंग का हाफ अंडररवियर पूरा फूला हुआ था.. जैसे मानो अभी उनका लंड बाहर आ जाएगा..
मेरा एक मन किया कि उसे ऊपर से दबोच लूँ.. पर डर और झिझक के मारे मैंने ऐसा कुछ नहीं किया।
फिर अंकल ने मेरी ब्रा खोल दी.. जैसे ही मेरी ब्रा खोली.. मेरा कलेजा एकदम से मुँह को आ गया।
उन्होंने मेरे दोनों चूचे निकाल कर आज़ाद कर दिए।
वैसे उस समय मैं 32 इंच की ब्रा पहनती थी.. क्योंकि मेरे दूध छोटे थे..
अंकल होंठों से मेरे निप्पलोन को चूमने लगे, फिर मेरे समोसे जैसे मम्मों को दाँत से काटने लगे।
मैं तो पूरी तरह से पागल हो चुकी थी।
मेरी जिंदगी की यह पहली घटना थी इसलिए मैं चुपचाप सब होते हुए देखती रही और अंकल ने बाथरूम की लाइट ऑफ करके दरवाजा खोल कर मुझे दूसरे कमरे में ले गए।
रेलवे क्वॉर्टर में 2 कमरे होते हैं और इनका बाथरूम बहुत छोटा होता है इसलिए वो मुझे गोद में उठा कर दूसरे कमरे में ले गए।
वहाँ मुझे फर्श पर लिटा दिया, उस कमरे में अंधेरा था इसलिए मैं कुछ साफ़ नहीं देख पा रही थी।
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