अब्बू के दोस्त और मेरी अम्मी की बेवफाई -2

(Abbu Ke Dost Aur Meri Ammi Ki Bewafai- Part 2)


This story is part of a series:

अंकल की निगाह मेरे कमसिन जवानी पर

अब तक आपने पढ़ा..

अंकल अम्मी को अपनी बाँहों में लेकर.. उनके होंठों को चूसने लगे, अब वो भी अंकल का साथ दे रही थीं।

मेरे लिए यह अनुभव जन्नत से कम नहीं था। असलम अंकल ने उठकर अम्मी के पाँव सहलाने शुरू कर दिए और उसमें गुदगुदी करने लगे। अम्मी अपना पाँव हटाने लगीं।
वह दोनों किसी प्रेमी जोड़े की तरह एक-दूसरे से खेल रहे थे, उनके अन्दर कोई जल्दबाजी नहीं थी, दोनों एक-दूसरे को प्यार कर रहे थे।

अब आगे..

असलम अंकल उनकी पायल को चूमने लगे और हाथ से पाँव पर मालिश करने लगे। असलम अंकल धीरे से अम्मी की पैंटी की तरफ पहुँचे और उसे उतार कर किनारे रख दी।

उनका लण्ड जो इतना खड़ा हो चुका था कि चड्डी फाड़ रहा था। अंकल पूरे नंगे हुए और अम्मी की टांगें ऊपर करके अपना सात इंच का लण्ड अम्मी की फूली हुई चूत में डाल दिया।
अम्मी सिसकार उठीं- अअह आआ.. आआह.. अहह..हाहा आआहह्ह..हा असलम धीरे-धीरे.. ज़ीनत उठ जाएगी.. अहह्ह..सिइइइ..

अम्मी ने मेरे जाग जाने के डर से अपनी आवाजें बंद कर लीं। असलम अंकल धीरे-धीरे चुदाई की गति तेज करने लगे। अम्मी की चूड़ियाँ खन-खन कर रहीं थीं।
अंकल उनको तेज-तेज चोदने लगे।

अम्मी भी अंकल के कंधे को पकड़ कर अपनी तरफ खींच रही थीं.. वैसे ही असलम अंकल भी तेज स्पीड में उनकी चूत में धक्के लगा रहे थे। उनका सात इंच का लण्ड अम्मी की चूत में पूरा पेवस्त हो रहा था। अम्मी अपनी टांगें ऊपर किए हुए बिस्तर पर पड़ी लम्बी-लम्बी साँसें भर रहीं थीं।

तकरीबन आधे घंटे तक असलम अंकल अम्मी को लण्ड डालकर चोदते रहे.. उसके बाद वे दोनों शांत हो गए। इसी के साथ उनकी पायलों की 'छुन-छुन' भी बंद हो गई थी। शायद असलम अंकल झड़ चुके थे।

वह दोनों काफ़ी देर बिस्तर पर नंगे ही पड़े रहे.. उसके बाद फिर वो दूसरी बार के लिए तैयार हुए।

कुछ देर बाद उन्होंने अम्मी को फिर से चूमना-चाटना शुरू कर दिया। अम्मी ने भी असलम अंकल के लण्ड को मुँह में लेकर उनके लौड़े को चूसना शुरू किया। पहली ठोकर के सारे वीर्य साफ़ को किया।

असलम अंकल अम्मी को फिर से प्यार करने लगे। उनके दूध दबाने शुरू कर दिए। अब असलम अंकल का लौड़ा फिर से हाहाकारी हो गया था। इस बार उन्होंने अम्मी को उल्टा किया.. मतलब अंकल ने अम्मी को कुतिया बना दिया।

'ऐसे पीछे नहीं असलम…'
'तुम जानती हो मुझे कुतिया बना कर तुम्हारी गाण्ड मारना बहुत अच्छा लगता है.. शहनाज़..'
असलम अंकल ने अपना मूसल अम्मी की गाण्ड के छेद में लगाया और उनके चूतड़ों पर एक थपकी दी।

मैं सोच भी नहीं सकती थी कि मेरी अम्मी आज पूरी रंडी बनी हुई थीं।
अम्मी समझ गईं कि अब ये थपकी देने का मतलब है कि उनकी गाण्ड में लौड़े की शंटिंग शुरू होने वाली है। उन्होंने खुद को गाण्ड मराने के लिए तैयार कर लिया था।

असलम अंकल ने अम्मी की गाण्ड में शॉट मारा.. 'आआह्ह्ह.. धीरे-धीरे असलम..'
'बस बस शहनाज़.. हो गया..'
अम्मी के हलक से एक घुटी सी चीख निकली.. असलम अंकल का हाहाकारी लण्ड अम्मी की मुनिया की सहेली उनकी गाण्ड में पूरा घुस चुका था।

शहनाज़- प्लीज असलम.. धीरे-धीरे दर्द हो रहा है..
अम्मी के चेहरे पर दर्द साफ़ झलक रहा था।
'क्यों.. क्या अल्ताफ तुम्हारी गाण्ड नहीं मारता था?'
'नहीं.. वह गाण्ड मारने के शौक़ीन नहीं हैं.. मुझे इन्हीं धक्कों का और तुम्हारे लण्ड का बड़ी बेसब्री से इन्तजार था। मुझे नहीं मालूम था असलम कि तुम्हारा लौड़ा इतना बड़ा है.. आह्ह.. चोदो मुझे और जोर से चोदो..'