गर्लफ्रेंड के बिना उसकी सहेलियों संग थ्री-सम –6

(Girl-Friend Ke Bina Uski Saheliyon Sang Threesome- Part 6)


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अब तक आपने पढ़ा..
मैं उठा और किसी तरह उसकी एक टांग अपने एक हाथ से उठाकर और दूसरे हाथ से उसकी गाण्ड के पीछे ले जाकर उसकी चूत में अपना लण्ड धकेलने लगा.. और झटके मारने लगा.. जो ज्यादा तेज नहीं लग पा रहे थे।

फिर प्रियंका बोली- रुको जीजू.. ऐसे मजा नहीं आ रहा.. और उसने बाल्टी का सारा पानी गिराकर.. बाल्टी उलटी करके अपने एक टांग के नीचे रख लिया.. जिससे मेरा संतुलन सही हो गया.. और मैं अब दोनों हाथ से.. पीछे से उसकी गाण्ड पकड़ कर सीधे तेज-तेज झटके मारने लगा।

प्रियंका ने अपने दोनों हाथ मेरे कंधे के ऊपर से डाल लिए.. जिससे उसको और मुझको दोनों को आसानी हो गई..
अब मैं अब उसकी तेजी से चुदाई करने लगा।

लण्ड के अन्दर-बाहर जाने की आवाज.. 'चट.. चट.. चटाक..' इतनी मनमोहक और तेज हो रही थी कि बाहर डिनर तैयार कर रही सुरभि के कानों तक पहुँच रही थी।

अब आगे..

वो एक थाली में बेंगन.. आलू.. मिर्ची.. वगैरह लिए खड़ी हुए दरवाजा खोलते हुए बोली।
सुरभि- चुदक्कड़ों.. बाथरूम में भी चालू हो गए.. वो भी अकेले-अकेले.. हम्म्म?

प्रियंका गर्म आवाज में बोली- साली जा ना.. अपना काम कर कुतिया.. डिनर तैयार कर.. तेरी भी गाण्ड मारेगा बाद में.. तेरा जीजू.. काहे चिंता कर रही है रंडी.. चल भाग कुतिया.. और मुझे चुदने दे..
सुरभि दरवाजा खुला छोड़ कर सामने ही दीवान पर बैठ कर.. सब्जी काटने लगी.. और हमको देख कर.. धीरे-धीरे गर्म हो रही थी।

मैं यहाँ प्रियंका की चूत में लण्ड तेजी से अन्दर-बाहर पेल रहा था।
प्रियंका ने मुझे जोश दिलाते हुए कहा- आह जीजू.. चोदो अपनी साली को.. आह चोदो.. चोदो अपनी कुतिया रंडी को..
मैं जोश में धक्के पे धक्के मारने लगा.. बाथरूम में 'चपक.. चटाक.. चट.. चट..' की आवाज गूंजने लगी।

बाहर बैठी सुरभि को चुदाई की मधुर सरगम सुनाई दे रही थी। प्रियंका की नजर सुरभि पर पड़ी.. सुरभि मदहोशी में.. अपने लम्बे टॉप के ऊपर से.. एक चूचा दबा रही थी.. और अपने निप्पल्स को चाकू से सहला रही थी.. शायद उसे भी नहीं पता था कि वो चाक़ू से चूचुक रगड़ रही थी.. वो बड़ी मदहोश थी।

प्रियंका- ओ कमीनी.. क्या कर रही है.. कट जाएंगे तेरे निप्पल.. रंडी.. साली कुतिया.. फिर क्या चूसेगा तेरा जीजा.. साली कुतिया.. इतना ही है तो बेंगन पेल ले अपनी चूत में मादरचोदी..

मेरी नजर भी उस पर पड़ी, सुरभि को भी जैसे होश आया.. उसने अचानक से चाकू थाली में रख दिया और एक काला बैंगन थोड़े छोटे और पतले साइज का अपने मुँह में डाल लिया और गीला कर लिया.. फिर थाली अपने पीछे रख कर.. अपनी दोनों टाँगें फैला लिए.. और हमको देखते हुए.. वो बैंगन अपनी चूत में डालने लगी, फिर धीरे-धीरे आगे-पीछे आगे-पीछे… बैंगन से चूत की चुदाई करने लगी।

यह देख कर.. मेरा जोश बढ़ गया और मैं तेजी से प्रियंका की चुदाई करने लगा।

प्रियंका- आह.. जीजू.. देख उस कुतिया को.. मादरचोदी कैसे चूत में बैंगन डाल रही रांड.. साली का मुँह देखो तो.. भाव तो देखो चेहरे के.. हरामिन के.. आह्ह..
मैं उसके चेहरे को देखते हुए मजा लेने लगा।

सुरभि हमारी तरफ देखते हुए बैंगन अन्दर-बाहर कर रही थी.. और उसका मुँह गोल में खुला हुआ था.. और उसके माथे की शिकन तीन लाइन बनाए.. ऊपर को थीं.. भौंहें ऊपर को उठी थीं। उसका चेहरा इन भावों में बहुत ही मादक लग रहा था।

यह देखते ही.. मैंने उसके चूतड़ों को कसके पकड़ कर.. तेज-तेज.. अपना लण्ड उसकी चूत में पेलने लगा। उसने मेरे लण्ड को पकड़ कर बाहर निकाल कर खुद अपनी गाण्ड के छेद में लगा दिया और एक हाथ से मेरे पीछे से गाण्ड को अपनी और धकेलने लगी.. जिससे मेरा लण्ड उसकी गाण्ड सरसराता सा चला गया।
बस उसकी चूत के लिसलिसे पानी की वजह से 'चप.. चप.. छपक..' की आवाज आने लगी।