शाज़िया की चूत गर्म हो गई
(Shaziya Ki Chut Garam Ho Gayi)
मैं दिल्ली का अरुण एक बार फिर से आप सभी के लौड़ों में जान डालने और लड़कियों की चूतों से पानी निकालने के लिए आप सभी के सामने अपनी एक और बिल्कुल नई कहानी लिखने जा रहा हूँ।
दोस्तो, कहानी की नायिका मेरी गर्लफ्रेंड शाज़िया है.. जिसका फिगर एकदम मलिका की तरह है। उसके चूचे 34 कमर 28 और गाण्ड.. ओए होए कयामत.. 36 की है।
शाज़िया मुझे 'जाना' और मैं शाज़िया को 'जान' बोलता हूँ।
हमारी मुलाकात एक इंस्टिट्यूट में हुई थी और पहली नज़र में ही शाज़िया मुझे पसंद आ गई थी। बस मैंने देर ना करते हुए उसे प्रपोज कर ही दिया.. मगर उसकी तरफ से पहला जबाव नहीं आया।
कुछ महीने बिना उससे बात किए यूँ ही निकल गए.. मगर उसकी नज़र हमेशा ही मुझ पर रहती थी.. और आख़िर एक दिन शाज़िया ने इन्स्टिट्यूट से निकलते हुए मुझे 'आई लव यू' बोल ही दिया। बस उसी टाइम हम दोनों ने अपने-अपने फोन नम्बर एक्सचेंज कर लिए और फोन पर पहले दिन से ही हम 'जान' और 'जाना' बन गए और बस दो-तीन दिनों में ही हम दोनों की सेक्स को लेकर बात होने लगी।
शाज़िया एक एनजीओ में स्टिचिंग भी सीखती थी और खुद भी उसी एनजीओ में मार्शल आर्ट सिखाती थी।
अब हम दोनों इन्स्टिट्यूट के बाद अकसर मिलते और अपनी जान से एनजीओ गोल करवा कर हम दोनों जापानीज पार्क में जाकर किस वगैरह किया करते और एक-दूसरे के शरीर को बहुत अच्छे से सहलाते थे।
एक दिन किस करते हुए मैं अपना एक हाथ उसकी चूत पर ले गया, उसकी चूत एकदम गीली हो चुकी थी।
मेरे पूछने पर शाज़िया ने बताया- तुम बहुत रोमांटिक हो.. तुम्हारे छूते ही मेरे अन्दर एक करंट सा लगता है और तुम्हारे किस करते ही मैं झड़ जाती हूँ।
मेरे पूछने पर उसने ये भी बताया कि झड़ने में बाद मेरे सेक्स की प्यास बहुत बढ़ जाती है।
फिर तो सेक्स के अलावा हम दोनों और कुछ नहीं सूझता।
एक दिन शाज़िया ने मुझे फोन किया और बताया- आज मैं घर पर अकेली होने वाली हूँ.. घर पर कोई भी नहीं रहेगा.. मम्मी-पापा और बहन जाने वाले हैं.. वे सभी आज रात को वापस आएँगे.. उनके जाने के बाद मैं तुम्हें फोन करूँगी।
'ओके.. जान..'
शाज़िया ने अपने घर वालों के बाहर जाते ही मुझे फोन किया।
मैं तो जैसे उसके फोन का वेट ही कर रहा था.. जिसके आते ही मैं शाज़िया के घर पहुँच गया और उसके कमरे में पहुँचते ही मैंने शाज़िया को पकड़ कर अपने पास खींच लिया और अपने होंठ उसके होंठों से लगा दिए।
शाज़िया ने अपने आपको छुड़ाते हुए कहा- आते ही लग गए गर्म करने.. रूको तो जरा.. पहले मैं गेट तो बंद कर दूँ.. आज शाम तक मैं तुम्हारी ही हूँ.. जो चाहो वो कर लेना।
कहते हुए शाज़िया ने गेट लगा दिया और खुद ही मुझे कुछ इस तरह किस करने लगी.. जैसे मेरे होंठों को खा ही जाएगी। उसकी किस में मैं खो सा गया था और उसका पूरी तरह से साथ दे रहा था।
बस हम दोनों किस करते-करते मैंने शाज़िया की टी-शर्ट उतार दी। उसने अन्दर कुछ भी नहीं पहना था। उसके 34 के चूचे मेरे सामने थिरक रहे थे.. जिन्हें देखकर मुझसे रुका नहीं गया और उसके चूचों को बुरी तरह से चूसने लगा। शाज़िया भी पूरी तरह से पागल हो गई और मेरे कपड़े खुद ही उसने अपने हाथों से उतार दिए।
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