पड़ोसन भाभी की ननद की चुदने की लालसा
(Padosan Bhabhi Ki Nanad Ki Chudne Ki Lalsa)
हैलो दोस्तो.. लंड और चूत के मालिको.. आशा करता हूँ कि आप सभी अपने लंड और चूत की प्यास किसी ना किसी तरह बुझा ही रहे होंगे।
मैं अरुण आपके समक्ष फिर से अपने दोस्त की कहानी को अपने शब्द देने जा रहा हूँ। मुझे आप सबसे उम्मीद है कि पहली कहानी की तरह इस कहानी पर भी अपने कमेंट्स जरूर लिखेंगे।
कहानी के नायक का नाम पवन है जो काम करने के साथ-साथ पढ़ाई भी कर रहा है.. और पड़ोस वाली सीआईएसएफ़ वाले की बीवी को अभी भी अपने 6.5 इंच लम्बे लंड से पानी पिला रहा है।
इस बार कहानी की नायिका है भाभी की ननद.. जिसका नाम ऋतु है। ऋतु भी किसी आइटम से कम नहीं है। साली गोरी तो इतनी है कि जहाँ हाथ मारो वहीं टमाटर जैसी बन जाती है एकदम लाल..
आप खुद सोचो जो ऊपर से इतना लाल हो जाती हो.. तो उसकी सील पैक चूत कैसी कमाल की होगी।
जैसा कि आपने मेरी पहली कहानी
पड़ोसन भाभी की चूत चुदाई जन्नत मजा
में आपने पढ़ा कि किस तरह सीआईएसएफ़ वाले की बीवी और बहन को पेपर दिलाने के लिए ले जाकर भाभी को उसकी ननद के आगे चोदा था.. हाँ मगर भाभी की ननद को हमने नींद की गोली देकर सुलाने के बाद ही सेक्स किया था।
मैं भाभी और और ऋतु (भाभी की ननद) को पेपर दिला कर हम सब वापस अपने घर आ चुके थे। मगर जब हम वापस आ रहे थे तो ऋतु का स्वभाव मेरे प्रति कुछ बदल सा गया था.. जिससे मुझे शक सा हुआ कि इसने भाभी और मेरे बीच जो भी हुआ.. वो देख तो नहीं लिया.. क्योंकि उस रात भाभी और मैंने 3 बार चुदाई की थी और उस चुदाई में यह तक भी भूल गए थे कि बराबर में ऋतु भी है।
अब घर आने के 4 दिन बाद भाभी मेरे पास आई और कहने लगीं- पवन दो दिन बाद तुम्हारे भैया वापस आ रहे हैं और ऋतु को हमारे बीच जो भी हुआ.. वो सब पता है.. उसने कहा है 'भाभी उस रात तुम और पवन ने जो भी रास रचाया था.. वो मुझे सब पता है.. मगर ये नहीं पता कि मैं कब सो गई थी.. मगर जब मेरी आँखें खुलीं.. तो मेरे कानों में तुम्हारी और पवन की सिसकारियों की आवाज़ आ रही थी.. और ये सब देखकर भी अंजान भी रही।' पवन तुम ठीक सोचते थे कि ऋतु को जब पता लग गया है।
अब पवन की गाण्ड भी फटने लगी.. क्योंकि एक तो सीआईएसएफ़ वाला आ रहा था ऊपर से उसकी बहन को भी सब पता लग गया था।
'तो भाभी आपने ऋतु से क्या कहा कि सब तो बहुत पहले से चल रहा है।'
'अरे पागल जिस तरह तेरी गाण्ड फटे जा रही है.. ठीक उससे भी ज्यादा मेरी उस टाइम फटी थी.. मगर..'
'मगर क्या भाभी.. जल्दी बताओ मुझे..?'
'अरे मेरे गोलू.. उसने ये भी बताया था कि वो भी हम दोनों को देखकर झड़ गई थी और उसका भी चुदने का मन कर रहा था।'
बस इतना सुनते ही मेरा लंड तो अब ऋतु के लिए खड़ा हो गया, मैंने भाभी से कहा- भाभी मुझे भी उसकी चूत दिलवा दो.. यार कुछ जुगाड़ बनाओ ना..
यह बात सुनकर भाभी गुस्सा हो गईं.. और जाने लगीं।
मैं भाभी का हाथ पकड़ कर उन्हें समझने लगा मगर वो नहीं समझ रही थी। तो मैंने उनकी चुदाई करनी शुरू कर दी.. जिससे वो मान भी गईं और मुझसे कहने लगीं- देख जुगाड़ तो तेरा करा दूँगी.. मगर उसके बीच में आ जाने से हमारे बीच का ये खेल खत्म नहीं होना चाहिए।
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